Tuesday, December 28, 2010

meri tumhari dastaan...

कँहा से शुरु हुई थी
और कँहा जाकर खत्म हुई,
ये मेरी तुम्हारी दास्ता,
कुछ याद नहीँ.......

कँहा इसका आगाज़ था
क्या अन्जाम हुआ इसका,
या अभी अधूरा ही है किस्सा,
कुछ याद नही...

बस ये खबर है कि
अब ये कभी पूरा होगा नही
छूटी थी बात अधूरी कँहा
कुछ याद् नही.......

मुमकिन है तुम भी भूल जाओ
जिन्दगी के अगले मोड़ तक हमे,
तुम हमे याद हो कि नही
कुछ याद नही...........
अंजुरी भर पानी से ,
बरसों की अतॄप्त प्यास
मिटती नहीं है
...
और बढ़ ही जाती है.
पल भर की बारिश 
हो जाये अगर बेमौसम
मिट्टी भीगेगी तो क्या
पल भर को महक जाती है.....
मगर कुछ पाने की आस 
फिर हद से गुजर जाती है...
अब अगर मिल जाओ कहीं
फिर ना देना मुझे
अंजुरी भर प्यार का उपहार....

एक बार जो तुम आ जाते..........


विरह का वेदना से सम्बन्ध
दिल आज समझ पाया है
क्या लिखा था आँखों में तुम्हारी
मन आज ये पढ़ पाया है 
दिल ही दिल मे की भक्ति को
हम भी अपना नमन दे पाते,
एक बार जो तुम आ जाते..

जुदाई ने आकर समझाया रिश्ता
जो दिल ने दिल से बाँध लिया था
अब तुम्हारे लिये तरसता ये दिल
तब क्यूं ना तुमने इज़हार किया था
मन के आँगन में प्रेत से भटकते 
ख्वाब सारे मोक्ष पा जाते,
एक बार जो तुम आ जाते.