कँहा से शुरु हुई थी
और कँहा जाकर खत्म हुई,
ये मेरी तुम्हारी दास्ता,
कुछ याद नहीँ.......
कँहा इसका आगाज़ था
क्या अन्जाम हुआ इसका,
या अभी अधूरा ही है किस्सा,
कुछ याद नही...
बस ये खबर है कि
अब ये कभी पूरा होगा नही
छूटी थी बात अधूरी कँहा
कुछ याद् नही.......
मुमकिन है तुम भी भूल जाओ
जिन्दगी के अगले मोड़ तक हमे,
तुम हमे याद हो कि नही
कुछ याद नही...........
और कँहा जाकर खत्म हुई,
ये मेरी तुम्हारी दास्ता,
कुछ याद नहीँ.......
कँहा इसका आगाज़ था
क्या अन्जाम हुआ इसका,
या अभी अधूरा ही है किस्सा,
कुछ याद नही...
बस ये खबर है कि
अब ये कभी पूरा होगा नही
छूटी थी बात अधूरी कँहा
कुछ याद् नही.......
मुमकिन है तुम भी भूल जाओ
जिन्दगी के अगले मोड़ तक हमे,
तुम हमे याद हो कि नही
कुछ याद नही...........