अंजुरी भर पानी से ,
बरसों की अतॄप्त प्यास
मिटती नहीं है
...और बढ़ ही जाती है.
पल भर की बारिश
हो जाये अगर बेमौसम
मिट्टी भीगेगी तो क्या
पल भर को महक जाती है.....
मगर कुछ पाने की आस
फिर हद से गुजर जाती है...
अब अगर मिल जाओ कहीं
फिर ना देना मुझे
अंजुरी भर प्यार का उपहार....
बरसों की अतॄप्त प्यास
मिटती नहीं है
...और बढ़ ही जाती है.
पल भर की बारिश
हो जाये अगर बेमौसम
मिट्टी भीगेगी तो क्या
पल भर को महक जाती है.....
मगर कुछ पाने की आस
फिर हद से गुजर जाती है...
अब अगर मिल जाओ कहीं
फिर ना देना मुझे
अंजुरी भर प्यार का उपहार....
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